कटघरे में हर शख्स

कटघरे में खड़ा
है हर शख्स
आज…

कुदरत पूछ रही
है कई सवाल
आज…

काबिल है क्या
कोई हम में से
जवाब जो
दे सके
आज…

काटी वही
शाख हमने
जिस पर आराम
फरमाया था तलक
आज…

फिर भी किसी
चमत्कार की
आस लगाऐ
बैठा है मानव
आज….

करिश्मा कोई
होगा नहीं
मानव को ही
करना होगा प्रयास
आज….

मानवता का फर्ज
निभाने,प्रकृति
का कर्ज
उतारने का
वक्त आया है
आज….

Comments

14 responses to “कटघरे में हर शख्स”

  1. बहुत सटीक वर्णन अनु…

    यह सब हमारा कर्म है जो आज कुदरत आक्रोश दिखा रही है
    हमें संभलना होगा

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत आभार प्रज्ञा

    1. Anu Singla

      Thanks g

  2. Amita Gupta

    मानवता का फर्ज निभाने, प्रकृति का कर्ज उतारने का वक्त आया है आज,
    बहुत सुंदर रचना

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यवाद अमिता

  3. बहुत खूब, अति उत्तम रचना

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत आभार जी

  4. Ekta Gupta

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत आभार एकता

  5. vikash kumar

    मानवता का फर्ज
    निभाने,प्रकृति
    का कर्ज
    उतारने का
    वक्त आया है
    आज….

    1. Anu Singla

      बहुत बहुत धन्यवाद

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