कटघरे में खड़ा
है हर शख्स
आज…
कुदरत पूछ रही
है कई सवाल
आज…
काबिल है क्या
कोई हम में से
जवाब जो
दे सके
आज…
काटी वही
शाख हमने
जिस पर आराम
फरमाया था तलक
आज…
फिर भी किसी
चमत्कार की
आस लगाऐ
बैठा है मानव
आज….
करिश्मा कोई
होगा नहीं
मानव को ही
करना होगा प्रयास
आज….
मानवता का फर्ज
निभाने,प्रकृति
का कर्ज
उतारने का
वक्त आया है
आज….
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