जुस्तजू

‘छोड़ गए थे इसी जगह, अब चलना मुनासिब नही,
वो लौट आए तो मेरी जुस्तजू में परेशां होंगें..’

– प्रयाग

मायने :
जुस्तजू : तलाश

Comments

4 responses to “जुस्तजू”

  1. वाह वाह जी, अतिसुन्दर, आपकी लेखनी का प्रवाह अत्यंत मधुर है।

    1. हौसला अफज़ाई.के लिए बहुत शुक्रिया आपका

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