7 Comments

  1. बाल श्रमिक की मनोदशा का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया है कवि सतीश जी ने । पढ़ने लिखने की उम्र में गरीबी से तंग आकर बर्तन साफ करने में ही खाना खाना,जीवन की बुनियादी जरूरत को , तलाश करते बालक की मन: स्थिति की बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति

Leave a Reply