जो भी लिखता हूँ कविता
आप इश्रत ही समझना,
न मुझसे, न खुद से
बस खुदा से तिश्रगी रखना।
जब कभी मित्र बनकर
बैठना चाहोगे तो मैं भी
बिठाउँगा खुशी से आपको
दिल के बियाँबा में।
जो भी लिखता हूँ कविता
Comments
11 responses to “जो भी लिखता हूँ कविता”
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बहुत ही सुंदर, nice
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सादर धन्यवाद जी
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सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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सादर धन्यवाद शास्त्री जी
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वाह
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आभार जी
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Very nice lines
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