अँधेरे में हवा का झोका भी बनकर साया सा नजर आता है ! जब दिल-ओ-दिमाग खो दे सुध… तब मेरे यार.. अच्छा खासा *चोराया भी प्रेतघाटी कि माया सा नजर आता है !! *(चोराया=चौराहा) मुठी भर भीङ से क्यों घबराते हैं , जनाब ! जो डर जाए… अरे ! जो डर जाये उसे तो कुत्ते भी डराते है , जनाब !!
डर

Comments
16 responses to “डर”
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सुंदर
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धन्यवाद ! मित्र..
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Good
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जी धन्यवाद !
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Nice
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जी धन्यवाद..
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Welcome
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बहुत अच्छा
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धन्यवाद भाईसाहब !
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वाह
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सलाम !
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Nice one
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शुक्रिया साहब !
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Welcome
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बहुत सुंदर
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बहुत-बहुत धन्यवाद!
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