तलाश तेरी है

तलाश तेरी है
मेरा पता चले

ये नाम मेरा
क्यूं अनजान लगे
ये काम मेरा
इक बोझसा लगे

साथी जो बने
टिक ना सके
चाहा था जिन्हें
कबके ओझल हुए

दिन हो एकसा
यही आस लिए
बीती जा रही
सांस बिन रुके

नज़रों पे कब्जा
कहां हुआ कभी
शिकायत जब हुई
अपनी थी कमी

जुंबा है बेलगाम
नज़रें खुली अपलक
अपनी ही इन्द्रियां
गैर की झलक

Comments

5 responses to “तलाश तेरी है”

  1. Geeta kumari

    तलाश तेरी है
    मेरा पता चले…
    ________ जीवन के यथार्थ दर्शन कराती हुई कवि राजीव रंजन जी की बहुत सुंदर रचना, अति सुंदर भावाभिव्यक्ति

  2. अति उत्तम

  3. बहुत सुंदर रचना

  4. बहुत सुन्दर रचना, वाह

  5. यथार्थपरक रचना

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