तिलक तुम्हारी माया नगरी

तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है।
नशा नग्नता गुण्डागर्दी अब सरेआम हो रही है।।
चोरों का आतंक नगर में -डर नहीं लगता ।
ठगों के गिरोह डगर में – डर नहीं लगता।।
ड्रग्स का सेवन दिन रात करे पर – डर नहीं लगता।
खरीद फरोख्त दिन रात करे पर – डर नहीं लगता।।
अर्द्धनग्न होकर नित रहना- डर नहीं लगता।
रोज रोज नव मित्र बदलना – डर नहीं लगता।।
डर तो तब लागे जब जय जय श्री राम हो रही है।
तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है।।

Comments

14 responses to “तिलक तुम्हारी माया नगरी”

  1. Anuj Kaushik

    अति सुन्दर प्रस्तुति

  2. Geeta kumari

    यथार्थ परक अभिव्यक्ति

    1. शुक्रिया बहिन

  3. लाजवाब लेखनी 👏👏

  4. वाह, अतिसुन्दर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Praduman Amit

    अति उत्तम रचना।

    1. तहे दिल से शुक्रिया

  6. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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