तुमने रुला दिया मन

तुमने रुला दिया मन
जाने की बात कहकर,
क्यों बोलते हो ऐसा
कह दो ना आज खुलकर।
अब तो हमारे मन में
स्थान बन चुके हो,
छोड़ा ना बीती बातें
बैठो ना अपने बनकर।

Comments

22 responses to “तुमने रुला दिया मन”

  1. बहुत ही बढ़िया कविता

    1. धन्यवाद जी

  2. लाजवाब कविता

    1. सादर धन्यवाद

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. सादर धन्यवाद

  4. Praduman Amit

    दिलकश अंदाज में रचित रचना बहुत कुछ कह गयी पांडे जी।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. बहुत उत्तम

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद

  6. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद सर

  7. Geeta kumari

    कवि ने बहुत ही खूबसूरती से किसी अपने के लिए अपने मन की …. भावनाएं व्यक्त की है……. हृदय स्पर्शी रचना।

    1. Satish Pandey

      इस बेहतरीन समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया गीता जी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद ऋषि जी

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

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