तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो…

तुम मेरी भावनाओं का
अनुवाद हो
तुम मेरी आकांक्षाओं का
आकार हो
साकार होगा हर स्वप्न मेरा
गर तुम जो मेरे साथ हो
तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के
बिम्ब हैं
तुम हमारे हम तुम्हारे
प्रतिबिम्ब हैं
दे ना दे गर साथ कोई
तुम हमारे ही रहोगे
मिलने में प्रियतम हमारे
अब कहाँ विलम्ब है….

Comments

6 responses to “तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो…”

  1. Master sahab

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद इतनी सुंदर और सटीक समीक्षा हेतु

  2. Abhishek kumar

    उच्च कोटि का शीर्षक तथा बहुत ही प्यारी बनके लिखी है।
    आपने तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद प्रेम को इससे
    ज्यादा सुंदर तरीके से व्यक्त किया ही नहीं जा सकता ।
    मैं मास्टर साहब की बात से भी सहमत हूं।

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद

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