दया भाव रखो

अपनी आंखों में
दया भाव रखो
मदद करो गरीबों की
उनकी सेवा में खपो।
मिलेगा सुख स्वयं के भीतर से
कभी हरि नाम जपो,
मदद में लगो।

Comments

16 responses to “दया भाव रखो”

  1. वाह क्या बात है, बहुत बढ़िया

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    वाह, क्या ख़ूब लिखा है।बहुत सुंदर भाव। प्रत्येक भाव को बहुत ही सलीके से लिखते है सर, इस विलक्षण प्रतिभा को सलाम ।

    1. आपके द्वारा की गई इस सुंदर समीक्षा हेतु हार्दिक अभिवादन करता हूँ। आपने भाव को ग्रहण कर समीक्षा दी, सादर धन्यवाद, गीता जी

  4. बहुत खूब, wow

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

    1. Satish Pandey

      बहुत आभार जी

  5. जय हो गजब, too good

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  6. बहुत सुंदर भाव

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

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