12 Comments

  1. वाह,दादी जी की याद में बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति…
    दादी जी जहां भी होंगी प्रज्ञा,तुम्हे आशीष ही दे रही होंगी।

  2. दादी माँ को सादर श्रद्धांजलि देती सुन्दर पंक्तियाँ। बहुत खूब प्रज्ञा जी, हमारी ओर से भी दादी जी को शत शत नमन।

  3. पारिवारिक स्नेहित सम्बन्ध हमेशा के लिए हमारे साथ होते हैं। एक स्मरण के रूप में, एक अनुभूति के रूप में, आत्मा और परमात्मा के रूप में। जिसे आपने सुन्दर तरीके से दर्शाया है।
    बहुत खूब।

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