दिल पर जो गुज़री थी..

‘ दिल पर जो गुज़री थी उसे कुछ और ही रंग दे दिया मैंने,
आजकल बहुत खुश हूँ किसी ने पूछा तो कह दिया मैंने..’

– प्रयाग

Comments

12 responses to “दिल पर जो गुज़री थी..”

  1. क्या बात है
    अति उत्तम

    1. धन्यवाद जी

  2. बहुत ख़ूब

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  3. Praduman Amit

    वाह क्या कहने।

    1. Prayag Dharmani

      जी शुक्रिया

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