दिल व साँसों से सटे रहते हैं

ठंड में लब फटे से रहते हैं
आजकल वे कटे से रहते हैं,
दूर कितना भी चले जायें पर
दिल व साँसों से सटे रहते हैं।
कभी करीब आते हैं फिर
कभी दूर हटे रहे रहते हैं,
नैन अपने भी हठीले से हैं
हर घड़ी उन में डटे रहते हैं।

Comments

4 responses to “दिल व साँसों से सटे रहते हैं”

  1. बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति की है आपने
    भावनात्मक शैली में उम्दा रचना

  2. Geeta kumari

    ज़रा सा हास्य पुट लिए प्रेमाभिव्यक्ती करती हुई भावुक रचना ।

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