गये थे परदेश दो वक्त के रोटी कमाने।
क्या पता था करोना आएगा दिल जलाने।।
दिल में सपने ले के, चले थे हम परदेश ।
सपने सपने ही रह गए बदल गये हमारे भेष।।
कभी एक गज की दूरी तो कभी दो गज की दूरी।
कैसे कमाते हम यही थी हमारी मजबूरी।।
किस्मत व करोना ने क्या क्या रंग दिखाए।
मुंह (👄) में पट्टी बगल में करोना हाए हाए।।
कहे कवि चलो वापस चले बहुत कमा लिए यार ।
जिंदगी है अनमोल यही कहता है घर परिवार।।
दिल हार गया
Comments
8 responses to “दिल हार गया”
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👌
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Nice
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वाह
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Very nice
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👏
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👌👌
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samasaamayik ati sundar
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jay hind
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