दुःख-दर्द दूर हो मानव का

चल मेरे प्यारे साथी
अब असली कविता करते हैं।
दुःख-दर्द दूर हो मानव का
ऐसी कवितायें करते हैं।

Comments

8 responses to “दुःख-दर्द दूर हो मानव का”

  1. जी जरूर दिल के मैल साफ करके अच्छा-अच्छा लिखिए किसी को कुछ मत बोलिए
    यहाँ सब बहुत अच्छे हैं सर ok

    1. सादर स्वीकार 🙏🌹

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बिल्कुल सर ! अगर हम अच्छा सोचते हैं तो सारा जहान अच्छा लगने लगता है।
    इस नश्वर संसार में कितना सफ़र बाकी है कुछ नहीं पता। जब तक यहां है तब तक
    बस प्रेम बांटते रहे।🙏

    1. जी सर, बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद शास्त्री जी

  3. Geeta kumari

    Nice lines

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