*देवोत्थान एकादशी*

कार्तिक मास की,
शुक्ल पक्ष की एकादशी को
देवोत्थान एकादशी आई है
ये प्रबोधिनी एकादशी भी कहलाई है
हर्षोल्लास साथ में लाई है
आषाढ़ मास की,
शुक्ल पक्ष की एकादशी को
चार मास के लिए
देव शयन को जाएं,
शुभ-कारज भी ना हो पाएं
देवोत्थान एकादशी पर
देवों सहित
नारायण निंद्रा से जागें
शुभ-कारज भी होने लागें
प्रारम्भ होवे हर शुभ काम,
श्री गणेश हो लेकर हरि नाम
पद्मनाभ विष्णु जी का होता है आह्वान
पूजा-अर्चना की जाती है,
बना कर उनके पांव
गन्ना, बेर सिंघाड़ा शकरकंद
से लगता है भोग
समस्त परिवार पूजा पर
बैठे हाथों को जोड़
दीप जलाकर करें आरती
पद्मनाभ विष्णु जी की
उठो नारायण, उठो नारायण
से गूंजे घर-बार
प्रभु को शयन से,
उठाया जाए इस प्रकार

*****✍️गीता

Comments

6 responses to “*देवोत्थान एकादशी*”

  1. देवोत्थानी एकादशी का उम्दा चित्रण

    1. समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  2. बिल्कुल सही अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद प्रज्ञा

    1. सादर अभिवादन बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

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