छाती चौड़ी की
सिगरेट जलाई,
सोचता है इसे पी रहा हूँ।
तू नहीं पी रहा
इसको प्यारे
यह धुंआ तो मजे से तुझे पी रहा।
—– डॉ0 सतीश पाण्डेय
धुँआ
Comments
21 responses to “धुँआ”
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अच्छा
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जी पंडित जी
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nice message
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धन्यवाद जी
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धूम्रपान निषेध का जन सन्देश
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धन्यवाद
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Good massage 👏
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सादर आभार
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अतिसुन्दर जनसंदेश
आज ऐसी कविताओं की जरूरत है-
धन्यवाद जी
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Bahut Achcha Sandesh
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Dhanyvad
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धूम्रपान निषेध, good
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ji
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Waah
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🙏💐
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यह भी saavaan की ओर से सुंदर संदेश माना जायेगा, जय हो
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सादर धन्यवाद
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👌
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jay ho
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Very true
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