नयन नीर सींचे न सींचे..

वह सोचता है,
यदि रूठ जाऊं
तो वो मुझे मनाये
वो सोचती है रूठने पर
वो मुझे मनाये,
एक सोचता है
दूसरा मुझे मनाये
रूठने पर
न वो मनाती है
न वो मनाता है,
रूठना भी रूठ जाता है,
समय छूट जाता है
बहुत पीछे………
नयन नीर सींचे न सींचे..
प्यार सूखा रह जाता है….

Comments

14 responses to “नयन नीर सींचे न सींचे..”

  1. वाह सर, अतीव सुन्दर

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. बहुत ही शानदार

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  3. बहुत ख़ूब

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  5. Praduman Amit

    Bahut he sunder prastuti

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत आभार

  6. अतिसुंदर

    1. Satish Pandey

      सादर आभार

  7. अति सुंदर

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

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