नव प्रभात है

नव प्रभात है बीती निशा
उठ कर करो पूर्ण अपनी आशा,
स्वप्न करने को पूरे,
आया है दिवस सुनहरा l
रात भर जो देखे स्वप्न,
आओ पूरे करते हैं l
उठा तूलिका परिश्रम की,
उल्लास के रंग से,
अपना जीवन रंगते हैं॥
_______✍ गीता

Comments

8 responses to “नव प्रभात है”

  1. नव प्रभात है बीती निशा
    उठ कर करो पूर्ण अपनी आशा,
    स्वप्न करने को पूरे,
    आया है दिवस सुनहरा l
    रात भर जो देखे स्वप्न,
    आओ पूरे करते हैं l
    उठा तूलिका परिश्रम की,
    उल्लास के रंग से,
    अपना जीवन रंगते हैं॥

    जागती आँखों से देखे गए स्वप्नों को सच करने और नये उल्लास के साथ अपने दिन की शुरुआत करने की प्रेरणा प्रदान करती
    गीता जी की रचना

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  2. अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏

  3. Satish Pandey

    कवि गीता जी द्वारा रचित यह कविता महज कविता नहीं है, बल्कि नव आशा से जुड़ी आत्मीय कविता है। नवप्रभात को प्रकृति की प्राणमयता में रचती यह कविता पाठक के अंतस में रच रच जाने में सक्षम है। बहुत सुंदर प्रस्तुति

  4. Geeta kumari

    इस उत्साहवर्धक और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  5. vikash kumar

    Great poem

    1. Thank you Vikash ji Jai Shree Ram 🙏

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