जीवन क्या है?
क्या है जीवन!
लकड़ी का कोई फट्टा-सा,
पेड़ का कोई पत्ता-सा
कब टुट जाएं कुछ पता नहीं,
मानो कोई गुब्बारा-सा
तैरता मटका बेचारा-सा
कब फूट जाए पता नहीं।
नश्वर है, ये जीवन
Comments
14 responses to “नश्वर है, ये जीवन”
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बहुत खूब, मार्मिक
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धन्यवाद 🙏 जी
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Nice
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🙏
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Uttam vichar
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हार्दिक धन्यवाद 🙏 जी
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सत्य परन्तु मार्मिक
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, धन्यवाद मैडम जी 🙏
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सुन्दर रचना
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As Kabir said, यह संसार कागद की पुड़िया
बूंद पड़े घुल जाना है-

बहुत बहुत आभार मैडमजी 🙏
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भारतीय दर्शन का सुन्दरता से प्रस्तुति
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सादर धन्यवाद 🙏 जी
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बहुत ही उम्दा
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