नाच रहा मन मोर क्यों,
आज बिना बरसात,
है यह आहट प्रेम की,
या है कोई बात।
या है कोई बात,
उमड़ क्यों नेह रहा है,
साजन पर है गीत
तभी यह गेय रहा है।
कहे सतीश कभी न
आये कोई आंच
प्रेमी करता रहे
मन ही मन प्यारा नाच।
नाच रहा मन मोर क्यों
Comments
7 responses to “नाच रहा मन मोर क्यों”
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बहुत ही बढ़िया रचना है वाह
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत शानदार रचना
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सादर धन्यवाद
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नाच रहा मन मोर क्यों,
आज बिना बरसात,
है यह आहट प्रेम की,
या है कोई बात।
_______ छंद शैली में कवि सतीश जी की बहुत ही मधुर रचना, वाह लाजवाब अभिव्यक्ति, अति सुन्दर लेखन-
इस बेहतरीन समीक्षात्मक टिप्पणी हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।
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अति सुंदर लेखन
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