नादान पौधा

नन्ना-सा ,एक छोटा-सा ,
टहनी बड़ी, मगर कोमल-सा,
अकेला मनोहर पौधा,
तेज हवाओं में ,वो झूला झूले,
कभी इधर कभी उधर,
क्रीडा ललाम बड़ी सुहावनी,
बारिश में वो नृत्य करें,
मगर माली ठहरा क्रुर-सा,
पौधा उसे नापसंद करें,
बांध दिया उसने उसको,
मोटी-सी एक डंडी से,
हो गया बेचारा कैदी-सा,
पकड़ा-सा कोई भेदी-सा,
कैसे हवाओं में वो झूमे,
कैसे धरती को वो चूमे ,
पल-पल पुरानी यादें,
मन में एक विद्रोह करें,
मगर बड़ा हुआ जब पौधा,
माली से क्यों प्रेम करें?
माली से बहुत प्रेम करें।

Comments

10 responses to “नादान पौधा”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    माता पिता का संतान के प्रति दिए गए संस्कार रूपी स्तम्भ से बांधकर सामाजिक परिवेश में सफल इंसान बनाने की प्रक्रिया को
    पौधा और माली के रूप में सुन्दर और यथार्थ प्रस्तुति।
    बहुत खूब।

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर समीक्षा शास्त्री जी ,
    आपने तो मेरे हृदय से लगभग सभी भाव निकाल लिए,👌👏👏👏👏
    बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद 🙏

  3. सुदर उपमा का प्रयोग किया है आपने काबिले तारीफ

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत-बहुत आभार प्रज्ञा जी

  4. बेहद खूबसूरत तरीके से एक पीढ़ी और दूसरी पीढ़ी के तारतम्य को दिखाया है। अति सुन्दर चित्रण

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद मैम

  5. प्रतिकात्मक शैली का बहुत सुंदर प्रयोग
    जैसे आंधी तूफान से बचाने के लिए माली पौधे को लकड़ी की छड़ से बांधता है उसी प्रकार माता पिता अपने बच्चों को संस्कारों के द्वारा अच्छे बुरे का भेद कराते हैं
    बेहतरीन रचना

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार ऋषि जी

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