निकला था मैं ढुंढने ,
कोई ऐसा इंसान ,
जो बिल्कुल खुश ,
बिल्कुल सुखी,
बिल्कुल स्वस्थ,
चिन्तामुक्त,
तेज़युक्त,
मुझे मिला !
पर वो इंसान नहीं
अपना दुःख ,
दूसरों के मुकाबले सुक्ष्म -सा।
निकला था मैं ढुंढने
Comments
8 responses to “निकला था मैं ढुंढने”
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बहुत खूब
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धन्यवाद जी
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,sunder
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धन्यवाद जी
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अकाट्य सत्य
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धन्यवाद जी
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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🙏🙏🙏
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