किंकणी न बाँधिये
पैरों में अपने,
बिना खन-खनाहट के
पहचान लेंगे।
कभी आजमा के
देख लीजियेगा,
तुन्हें बन्द आंखों से
पहचान लेंगे।
पहचान लेंगे
Comments
16 responses to “पहचान लेंगे”
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Wow nice poem
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सादर धन्यवाद
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति
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प्रणाम
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सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी
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बहुत ही खूबसूरती से अभिव्यक्ति किया है भावों को।
कम शब्दों में मन के भाव बयां करना कोई आपकी कलम से सीखे।
……. सैल्यूट।-
इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु आपका आभार व्यक्त करता हूँ। आपके द्वारा किया जा रहा उत्साहवर्धन बल प्रदान करता है। बहुत सारा धन्यवाद
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सुंदर
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आभार, शास्त्री जी
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद प्रतिमा जी
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Waah
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद
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