पारखी नजर

हुनर सब में है बस तराशने की जरूरत है
हीरा बन सकता है हर पत्थर बस
पारखी नजर की जरूरत है…

Comments

5 responses to “पारखी नजर”

  1. बहुत ख़ूब

  2. सुन्दर रचना

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