8 Comments

  1. मैंने पूरी कविता पढ़ी है । बहुत सुंदर कविता है ऋषि जी । भारत में माहौल ही इतना खराब हो चुका है ,आपने आजकल के महौल पर बहुत ही भली प्रकार प्रकाश डाला है ।कहीं भ्रूण हत्या, कहीं बलात्कार ,कहीं एसिड अटैक ।लगता है भविष्य में भगवान भारत में बेटी देने से भी डरेंगे और बेटियां पैदा होने से । बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ।आपकी कविता तारीफ़ के काबिल है ।
    “गर यूं ही चलता रहा तो,
    भारत में भगवान भी बेटी ना देंगे
    फ़िर कहां से वंश बढ़ाओगे
    बेटी ही पैदा ना होगी
    तो बहू कहां से लाओगे”।।

  2. कवि ऋषि जी, आपकी कविता को ध्यान से पढ़ा, और मन में बहुत खुशी हुई कि आपने बहुत ही चरणबद्ध तरीके से कविता को आगे बढ़ाया है। आपके युवा चिंतन से जितनी अपेक्षा मुझे थी आपने उससे अधिक बेहतरीन चिंतन प्रस्तुत किया है। बेटी के साथ जिस तरह अत्याचार हो रहे हैं, वह अत्यंत चिंताजनक है। आपने सटीक कविता लिखी है। अंत में सुन्दर संदेश भी दिया है कि-
    कहे “ऋषि” अब जोर लगा कर,
    सब कोई बेटी को सम्मान दो,
    दहेज प्रथा अब खत्म करो,
    लड़कों को संस्कार दो|
    शिल्प के अंतर्गत बहुत ही बोधगम्य भाषा का प्रयोग है, जिससे आपकी कविता की सम्प्रेषणीयता सरल हो गई है। बहुत सुंदर रचना। keep it up

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