पुकार रही है भारतमाता

पुकार रही है भारतमाता
आप सभी संतानों को,
कलम उठा लो, खड़क उठा लो
ख़त्म करो हैवानों को.
बाहर-भीतर देश के दुश्मन,
जो उन्नति के बाधक हैं,
सामाजिक ताने-बाने को
तोड़ रहे जो कारक हैं.
लिखो उजागर करो उन्हें
सच्चाई को आगे लाओ,
कलम तुम्हारी खड़क बनेगी
धार तीव्र करके आओ.
कलम उठालो, खड़क उठालो
तभी देश उन्नत होगा,
वरना यह घुन भीतर – भीतर
हम सबको धोखा देगा.
साफ़ करो भीतर के दुश्मन
ख़त्म करो हैवानों को,
पुकार रही है भारतमाता
आप सभी संतानों को.
—– डॉ. सतीश पाण्डेय, चम्पावत

Comments

12 responses to “पुकार रही है भारतमाता”

  1. Geeta kumari

    भारत के दुश्मन ,वो बाहर हों या भीतर उनको खत्म करने की लेखक की बहुत सुंदर भावनाएं …. जय हिन्द 🇮🇳

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद गीता जी

  2. Kumar Piyush

    ख़त्म करो हैवानों को, बहुत सुन्दर

  3. Satish Pandey

    धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      सादर आभार

  4. MS Lohaghat

    गजब, सावन की जय हो

    1. Satish Pandey

      जय हो

  5. बहुत हीं सुन्दर प्रस्तुति
    न तीर से न तलवार से
    क्रांति आती है कलम की धार से।

  6. कलम उठा लो यह कह कर
    कवि ने कलम को तलवार का रूप दिया है उसकी इस सोच को मेरा नमन बहुत ही उम्दा रचना

    1. Satish Pandey

      Thanks

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