प्यार के दो मीठे बोल

कुछ वक्त की ज़िन्दगी है,
फ़िर तो हमको है जाना
कुछ समझौते भी हुए यहां,
कुछ उपहार मिले माना
खाली हाथ ही तो आए थे,
खाली हाथ ही है जाना
ये तो निर्भर, करता है हम पर ,
कैसे करेगा फ़िर याद हमें ज़माना
बस प्यार के दो मीठे,
बोल ही रह जाते हैं..
यही आज इस दिल को है बताना
इसीलिए “गीता” गाए ये गाना..
बस , प्यार के दो मीठे
बोलों का रह जाना..
बस, यही है मेरी ,
ज़िन्दगी का अफ़साना..

*****✍️गीता*****

Comments

12 responses to “प्यार के दो मीठे बोल”

  1. Suman Kumari

    सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    सच कहा आपने ।
    किसी का स्थायी ठीकाना नहीं
    फिर क्यूँ न मधुरता को ही अभिव्यक्ति बनाया जाय।

    1. Geeta kumari

      भाव को समझने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी

  2. वाह बहुत खूब, बहुत बढ़िया

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका सर 🙏

  3. बहुत सुंदर शब्दों में बात कही है आपने

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा बहन

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर जीवन दर्शन
    बहुत ही सुंदर
    ,साश्वत, सत्य

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏 ये स्नेह यूं ही बना रहे ।

  5. Satish Pandey

    बस , प्यार के दो मीठे
    बोलों का रह जाना..
    बस, यही है मेरी ,
    ज़िन्दगी का अफ़साना।
    बहुत सुंदर बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति। अतीव सुन्दर

    1. Geeta kumari

      सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी 🙏
      प्रेरक समीक्षा हेतु बहुत बहुत आभार सर ।

  6. बहुत सुंदर कविता

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद। जोशी जी🙏 सादर आभार

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