प्रकृति का बदलाव

कलरव करता पंछी उड़ा आकाश तो अच्छा लगा,
शुद्ध हवा में आई सांस तो अच्छा लगा
ये कोरोना आया तो गलत है लेकिन,
प्रकृति का ये बदलाव अच्छा लगा
तारे चमक रहे हैं निर्बाध चमचम,
वो चमकता चांद भी अच्छा लगा
दूर नगर में उदास था कोई अपना,
वो आ गया है पास तो अच्छा लगा
ये शहर है अनजानों का मगर,
मिल गया कोई ख़ास तो अच्छा लगा

Comments

10 responses to “प्रकृति का बदलाव”

  1. Priya Choudhary

    बहुत खूब बहुत सुंदर रचना

  2. Geeta kumari

    बहुत बहुत धन्यवाद 💐

    1. Geeta kumari

      Thank you 🙏

  3. Vasundra singh Avatar

    बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद वसुंधरा जी

  4. प्रकृति का सुंदर वर्णन तथा श्रृंगार रस का प्रयोग बहुत ही उम्दा लग रहा है

  5. Satish Pandey

    बहुत ही सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद आपका 🙏

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