*प्रकृति वर्णन*

*प्रकृति वर्णन*

सुबह उठें हम सूरज की
मखमली रोशनी को पायें,
चिड़ियों का संगीत सुने और
फूल कोई कविता गायें ।।
भंवरों का संगीत मनोहर
हरियाली स्वर्ग सी है,
नदियों का मुड़ मुड़कर चलना
जैसे कोई नर्तकी है ।।
शाम ढ़ले तो चाँद चले
तारों की बारात लिये,
बूंदें पुलकित करती हैं जब
हों बादल बरसात लिये ।।
धरती, अम्बर, दरिया, जंगल
क्या कुछ हमको देते हैं,
प्रकृति की रक्षा करनी है ये
शपथ आज हम लेते हैं ।।

Copyright @ neelpadam नील पदम्

Comments

20 responses to “*प्रकृति वर्णन*”

    1. नील पदम्

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. नील पदम्

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. नील पदम्

      धन्यवाद

    2. नील पदम्

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. नील पदम्

      धन्यवाद

    1. नील पदम्

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. नील पदम्

      थैंक यू

    1. नील पदम्

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. नील पदम्

      धन्यवाद

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

    1. नील पदम्

      बहुत बहुत धन्यवाद

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