प्रतीक्षा

नव – प्रभात है बीती निशा ,
जागो कोई कर रहा प्रतीक्षा ।
धूप खिली है, सब पंछी भी उठ गए,
अब रैन कहां जो सोए हो।

Comments

20 responses to “प्रतीक्षा”

    1. Geeta kumari

      Thanks Rishi ji

  1. वाह वाह, बहुत सुंदर, जागो कोई प्रतीक्षा कर रहा है, से कर्म के प्रतीक्षा करने का बोध भी हो रहा है। लेखनी की विलक्षण क्षमता को सलाम।

    1. Geeta kumari

      आपकी प्रेरक समीक्षा के लिए बहुत सारा धन्यवाद सतीश जी 🙏
      बहुत प्रेरणा मिलती है सर आपकी समीक्षा से..

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया चंद्रा जी 🙏

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया भाई जी 🙏

  2. वाह जी बढ़िया पंक्तियाँ

    1. सादर धन्यवाद एवम् आभार सर🙏

  3. सुन्दर पंक्तियां

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका प्रतिमा जी🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you Mohan ji🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you dear sis. Pragya

  4. Devi Kamla

    अतिसुन्दर

    1. Geeta kumari

      Thanks for your nice complement 🙏

  5. Indu Pandey

    अतीव सुन्दर

    1. Geeta kumari

      आपका हार्दिक धन्यवाद एवम् आभार इन्दु जी 🙏

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