प्रभु! जरूर मिलेंगे।
तू हड़बड़ाता क्यों है ,
और घबराता क्यों है,
तेरे दुख दर्द को ,
कोई देख रहा है,
तू अपने ज़हन में ,
झांक जरा सा ।
वो रमा है तेरे ही,
अंतर्मन में;
मन के पटों को खोल जरा सा ।
वो सुनता है नादानों की,
तू छल कपट से हो दूर जरा सा ।
वो भूखा तेरी श्रद्धा का,
तू पाखंडों से बच जरा सा।
वो निराकार सा ,
पूरी प्रकृति में है विद्यमान,
हृदय की गहराइयों से पुकार ,
बस दिखावे से बच जरा सा।
Nice lines
🙏
वाह
धन्यवाद
जरा-सा
🙏
बहुत खूब