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  1. साँझ का सुन्दर बिम्ब प्रस्तुत करने के साथ साथ अति उत्तम कविता की सृष्टि हुई है। स्नेहिल और कोमल रचना। बहुत सुंदर रचना।

    1. इतनी सुन्दर और लाजवाब समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, उत्साह प्रदान करने के लिए हार्दिक आभार

  2. फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ,
    आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ।
    दिल में है जो प्रीत सुनाऊँ
    साँझ हो चली दीप जलाऊँ।
    चादर ओढ़े लालिमा की,
    साँझ सुहानी जाने लगी है।

    फागुन में गीत गाकर
    तथा सांझ का मानवाकरण करती हुई पंक्तियां

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