फिर मुस्कुरा दो

फिर मुस्कुरा दो
ठीक वैसे ही
कि जैसे मुस्कुराए थे
मिले पहली दफा जब।
जिंदगी की आपाधापी
चलती रहेगी अंत तक
प्रेम को भी दें समय
सच्चा यही है फलसफा अब।

Comments

14 responses to “फिर मुस्कुरा दो”

    1. सादर धन्यवाद जी

  1. Praduman Amit

    उच्च शब्दों से बनी आपकी कविता तारीफ़ ए क़ाबिल है।

    1. इस सुंदर टिप्पणी हेतु सादर धन्यवाद अमित जी

  2. Geeta kumari

    अति सुन्दर भाव एवम् सुन्दर प्रस्तुति।
    …….. Beautifully written……..
    …….Hats off….

    1. आपके द्वारा की गई इस शानदार समीक्षा का हृदय से आभारी हूँ गीता जी। thank you

  3. बहुत ही बढ़िया

  4. Piyush Joshi

    Very nice

    1. Satish Pandey

      Thank you

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