फिर मुस्कुरा दो
ठीक वैसे ही
कि जैसे मुस्कुराए थे
मिले पहली दफा जब।
जिंदगी की आपाधापी
चलती रहेगी अंत तक
प्रेम को भी दें समय
सच्चा यही है फलसफा अब।
फिर मुस्कुरा दो
Comments
14 responses to “फिर मुस्कुरा दो”
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Nice
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आभार
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अतिसुंदर भाव
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सादर धन्यवाद जी
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Nice lines
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Thank you ji
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उच्च शब्दों से बनी आपकी कविता तारीफ़ ए क़ाबिल है।
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इस सुंदर टिप्पणी हेतु सादर धन्यवाद अमित जी
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अति सुन्दर भाव एवम् सुन्दर प्रस्तुति।
…….. Beautifully written……..
…….Hats off….-
आपके द्वारा की गई इस शानदार समीक्षा का हृदय से आभारी हूँ गीता जी। thank you
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बहुत ही बढ़िया
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Thank you जी
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Very nice
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Thank you
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