तल घिसा जूता समझ
मुझको पहन मत बे-अकल
काई लगे हैं रास्ते
फिसलन अधिक है आजकल।
फिसलन अधिक है आजकल
Comments
16 responses to “फिसलन अधिक है आजकल”
-

वाह वाह
-
धन्यवाद जी
-
-

बहुत ही गजब
-
Thanks ji
-
-

Bahut achcha, likha hai
-
Thanks
-
-

क्या गजब उपमान, तल घिसा जूता, वाह
-
सादर धन्यवाद
-
-

क्या बात है
-
Thanks
-
-
Sunder
-
Thanks ji
-
-
गज़ब सर
-
बहुत खूब
-
-
Very true
-
धन्यवाद जी
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.