फिसलन अधिक है आजकल

तल घिसा जूता समझ
मुझको पहन मत बे-अकल
काई लगे हैं रास्ते
फिसलन अधिक है आजकल।

Comments

16 responses to “फिसलन अधिक है आजकल”

    1. धन्यवाद जी

  1. बहुत ही गजब

  2. क्या गजब उपमान, तल घिसा जूता, वाह

    1. सादर धन्यवाद

  3. क्या बात है

  4. Geeta kumari

    Very true

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

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