बगिया अधूरी है

जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है
बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है
बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी
हाँ जिन्दगी अधूरी है ।।
बेटी की थाली में,ना राखी हो ना रोली हो
तो बेटे के हाथों की कलाई भी अधूरी है ।।
बेटी ना हो तो बेटे की जयगान कैसे हो
बगैर कर्णावती के, हुमायूँ की पहचान अधूरी है ।।
गर लङाई हो ना झगड़ा हो,घर गुलज़ार कैसे हो
बगैर भाई के बहना की, हर ख्वाइश अधूरी है ।।
शान्ता न होती तो, रघुनन्दन कहाँ होते
बगैर सुभद्रा के, कान्हा की गान अधूरी है ।।
बहन से ही दीवाली में, दीपो की थाली है
बगैर उसके गुलालों की, हर रंगोली अधूरी है ।।
भाई न होता तो,उठाये कौन अरमानो की डोली
बगैर भाई के कंधों के, हर शहनाई अधूरी है ।।
कुल का लाल बेटा है, तो बेटी घर की लाली है
बगैर इन दोनों फूलों के, हर बगिया अधूरी है ।।
सुमन आर्या

Comments

10 responses to “बगिया अधूरी है”

  1. Geeta kumari

    वाह ,सुमन जी बहुत सुंदर कविता है

  2. Suman Kumari

    धन्यवाद गीताजी

  3. सत्य कहा आपने

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  4. बेटा और बेटा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं अगर एक ना हो तो दूसरा असंभव सा प्रतीत होता है एक दोनों के पूरक है भाई बहन

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      सादर आभार शास्त्रीजी

  5. सुंदर अभिव्यक्ति

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

Leave a Reply

New Report

Close