मेरी प्यारी हिन्दी

जिसको बोल कर,
मन हो जाए प्रसन्न ,
ऐसी मेरी यह भाषा है ।

भाव को मेरे बना दे दर्पण ,
करती है शब्दों का समर्पण ,
ऐसी मेरी यह भाषा है।

जैसा चाहूं वो बोल-लिख पाऊं ,
हर वर्ण में इसकी क्षमता है।
बन गई जो अभिमान मेरा
ऐसी मेरी हिंदी भाषा है।

Comments

14 responses to “मेरी प्यारी हिन्दी”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    correction–इसके क्षमता है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी 🙏

  2. बहुत ही सुन्दर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी 🙏

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब, अपनी प्यारी हिंदी भाषा पर प्रकाश डालती हुई सुरम्य पंक्तियाँ, वाह, यही सनातन सत्य है कि कवि व्याकरण के पीछे नहीं चलेगा बल्कि व्याकरण कवि के पीछे चलेगा, सही दिशा है,

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      सतीश सर !बहुत बहुत धन्यवाद 👌🙏

  4. Geeta kumari

    बहुत खूब ,अपनी हिंदी भाषा के सम्मान के लिए ,मेरी ओर से आपका बहुत बहुत सम्मान🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद 🙏 😊 जी

  5. Hindi bhasha Ek Aisi Bhasha hai jo Apne aap mein sampurn hai

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बिल्कुल सर! एकमात्र ऐसी भाषा जो जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी जाती है, हर शब्द ध्वनि के लिए उचित वर्णमाला है
      हिंदी के प्रति प्रेम भावना को दिखाने का एक छोटा सा प्रयास कविता के माध्यम से🙏

  6. हिन्दी एक भाषा हीं नहीं संस्कार भी है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बिल्कुल सर!🙏

  7. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर प्रस्तुति

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