जिसको बोल कर,
मन हो जाए प्रसन्न ,
ऐसी मेरी यह भाषा है ।
भाव को मेरे बना दे दर्पण ,
करती है शब्दों का समर्पण ,
ऐसी मेरी यह भाषा है।
जैसा चाहूं वो बोल-लिख पाऊं ,
हर वर्ण में इसकी क्षमता है।
बन गई जो अभिमान मेरा
ऐसी मेरी हिंदी भाषा है।
जिसको बोल कर,
मन हो जाए प्रसन्न ,
ऐसी मेरी यह भाषा है ।
भाव को मेरे बना दे दर्पण ,
करती है शब्दों का समर्पण ,
ऐसी मेरी यह भाषा है।
जैसा चाहूं वो बोल-लिख पाऊं ,
हर वर्ण में इसकी क्षमता है।
बन गई जो अभिमान मेरा
ऐसी मेरी हिंदी भाषा है।
correction–इसके क्षमता है
ji bahut khub
धन्यवाद जी 🙏
बहुत ही सुन्दर
धन्यवाद जी 🙏
बहुत खूब, अपनी प्यारी हिंदी भाषा पर प्रकाश डालती हुई सुरम्य पंक्तियाँ, वाह, यही सनातन सत्य है कि कवि व्याकरण के पीछे नहीं चलेगा बल्कि व्याकरण कवि के पीछे चलेगा, सही दिशा है,
सतीश सर !बहुत बहुत धन्यवाद 👌🙏
बहुत खूब ,अपनी हिंदी भाषा के सम्मान के लिए ,मेरी ओर से आपका बहुत बहुत सम्मान🙏
बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद 🙏 😊 जी
Hindi bhasha Ek Aisi Bhasha hai jo Apne aap mein sampurn hai
बिल्कुल सर! एकमात्र ऐसी भाषा जो जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी जाती है, हर शब्द ध्वनि के लिए उचित वर्णमाला है
हिंदी के प्रति प्रेम भावना को दिखाने का एक छोटा सा प्रयास कविता के माध्यम से🙏
हिन्दी एक भाषा हीं नहीं संस्कार भी है
बिल्कुल सर!🙏
बहुत सुंदर प्रस्तुति
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