एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था
पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही.
जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो
और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही.
ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा
यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही.
ख्वाब उसके टूट चुके थे
रिवायत ये बचपन से ही चलती रही.
वह तो कई साल पहले ही मर गया था
पर लाश पचपन तक चलती रही.
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