बहन की मुराद !!

वो हर कदम साथ देती थी
मेरा,
चाहे जितनी मुसीबतों ने हो घेरा..
हर मन्दिर में मेरी सलामती की
दुआ मांगती थी,
मैं बन जाऊं बड़ा यही मुराद
मांगती थी..
पैरों में जूते भी ना थे,
ना माँ-बाप का साया,
करके चाकरी घर-घर मेरी
बहन मुझे पढ़ाया..
आज बन गया हूँ मैं अफसर,
गाड़ी बंगला है नौकर-चाकर..
पर कोई भी खुशी नहीं है
जिसने देखे थे ये सपने
वो बहना ही दुनिया में
नहीं है..
मेरे सपने पूरे करते-करते,
कोरोना महामारी के चलते..
चली गई वह छोंड़ के दुनिया,
किस काम की है ये सारी खुशियाँ !!

Comments

14 responses to “बहन की मुराद !!”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना

  2. Geeta kumari

    बहन की सुंदर भावना की ,और उसकी याद में भाई की भावनाओं की अति सुन्दर प्रस्तुति ।

      1. Pragya Shukla

        आभार दी मेरा भाव समझने के लिए
        बस ऐसे ही मुझे हर कदम पर हौसला देती रहिएगा..

    1. बहन कोरोना की चपेट में आकर मर जाती है आज भाई के पास सब कुछ है परन्तु जिस बहन का यह सपना था वह बहन ही ना रही

      1. Geeta kumari

        बहुत ही मार्मिक और हृदय स्पर्शी रचना

  3. अतिसुन्दर

  4. मार्मिक अभिव्यक्ति

  5. Suman Kumari

    हर रिश्ता हमारे लिए खाश होता है
    भाई-बहन का रिश्ता हमारे लिए मन के पास होता है

  6. बात यह थी कि जिस बहन ने गरीबी झेलकर
    खुद चाकरी करके अपने भाई को पढ़ाया लिखाया और बड़ा अफसर बनाने का सपना देखा
    जब भाई बड़ा बन गया तो वह बहन ही ना रही तो किस काम की खुशियां रह गईं..

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