8 Comments

  1. सच ही तो है, भगवान तो स्वयं अपने घर में ही विराजमान होते है, माता पिता के रूप में। मंदिर में तो केवल उनकी छवि ही है। फ़िर भी लोग मंदिरों में जा कर भगवान को ढूंढते रहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भी गणेश जी ने भी शिव – पार्वती की परिक्रमा लगा के कहा था कि हो गई पृथ्वी की परिक्रमा पूर्ण ।

  2. माता पिता के सेवा में ही स्वर्ग है। भगवान को किससे देखा है।
    हम जो देख रहे है वह तो एक फिल्म चित्र है। वास्तविक भगवान तो हमारे माता पिता है। जिसने हमें जन्म दिया है। इस संसार में सब से बड़ा तीर्थ माता पिता के सेवा है। इ स तीर्थ से बड़ा और कोई तीर्थ नहीं है।

  3. मुझे मिले नहीं भगवान
    हाय, मन्दिर के भीतर।
    मैं बना रहा नादान
    हाय, मन्दिर के भीतर।।
    मातु-पिता सच्चे ईश्वर हैं
    क्यों न तू पहचान करे।
    बहुत सुंदर पंक्तियां
    बहुत सुंदर भाव, उम्दा लेखनी

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