मन किसी सूखी नदी सा हो रहा
आप कहती हो कि बारिश आ गई,
जो ये छींटे पड़ रहे हैं उनसे बस
एक सूनापन सा मन में गड रहा,
कब तलक यूँ ही घिरेगा आसमाँ
बूंदाबांदी ही रहेगी प्यार की,
कब तलक बिछुड़े रहेंगे आप हम
कब तलक बरसेगा खुलकर आसमाँ,
—————- Dr. सतीश पांडेय
बारिश
Comments
11 responses to “बारिश”
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वाह जी वाह, saavan में सावन बरस रहा है, तो प्रेम की बारिश जरूर होगी.
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Thanks
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Nice lines
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धन्यवाद जी
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बहुत उम्दा 🙏
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धन्यवाद जी
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सुंदर रचना
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धन्यवाद जी
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बेहतरीन
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sadar dhanyvaad ji
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सावन के मौसम में सावन की बात हो अपने आप में बड़ी बात होती है आपकी रचना में प्रकृति का सुंदर वर्णन किया गया है
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