हाय रे आज के इंसान

कितने बदल गये है इंसान।
बेच कर अपना ईमान।।
सच्चाई से कोस दूर भागे।
झूठ के बीज बोये बेईमान।।
बुरी नजर वाले का मुंह है गोरा।
नेकी करने वाले को बना दिए हैवान।।
झूठ के पर्दे में छूप कर।
बनते है आज के दयावान।।
अधर्म पे चलने वालों को।
गर्व से कह गए हम आज का ‘महान’।।

Comments

12 responses to “हाय रे आज के इंसान”

    1. Praduman Amit

      Thanks

  1. Satish Pandey

    ‘झूठ के बीज बोये बेईमान’ के रूप में अनुप्रास का सुंदर प्रयोग हुआ है। कविता में क्षेत्रीय बोली का सहज प्रयोग, ‘नेकी करने वाले को बना दिए हैवान’ में ‘दिए’ क्षेत्रीय रूप में है। बहुत सुंदर भाव हैं।

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद सर।

  2. आज के परिप्रेक्ष्य को दर्शाती बहुत सुंदर रचना

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    व्यंग्यात्मक शैली और वर्तमान में जो हो रहा है उस पर शानदार कटाक्ष
    “बुरी नजर वाले का मुंह है गौरा
    नेकी नेकी करने वाले को बना दिए हैवान”
    बहुत ही बेहतरीन!
    बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति! बधाई हो! 😊

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद मोहन सर।

  4. Geeta kumari

    Nice lines

  5. अनुप्रास अलंकार के साथ व्यंग भी किया है कवि ने इस कारण शिल्प बहुत मजबूत है तथा भाव पक्ष और कला पक्ष भी सराहनीय है

Leave a Reply

New Report

Close