बिना धागे के

मुझे जख्म लगते ही
वो सिलने बैठ जाता था…
बात इतनी-सी थी कि
वो बिना धागे के सिलता था…

Comments

16 responses to “बिना धागे के”

  1. Geeta kumari

    O ,wow fantastic

    1. धन्यवाद दी
      पर सच्चाई है तभी
      अच्छी लगी

      1. बिल्कुल प्रज्ञा जी

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    थोड़े शब्दों में बहुत गहरे भाव
    अतिसुंदर

    1. जी
      भाव समझने के लिए शुक्रिया

  3. बेहतर से भी बेहतर

    1. बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

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