मुझे जख्म लगते ही
वो सिलने बैठ जाता था…
बात इतनी-सी थी कि
वो बिना धागे के सिलता था…
बिना धागे के
Comments
16 responses to “बिना धागे के”
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गहन
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🙏🙏
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O ,wow fantastic
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धन्यवाद दी
पर सच्चाई है तभी
अच्छी लगी-
बिल्कुल प्रज्ञा जी
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थोड़े शब्दों में बहुत गहरे भाव
अतिसुंदर-

जी
भाव समझने के लिए शुक्रिया-

🙏
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बेहतर से भी बेहतर
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बहुत बहुत आभार व्यक्त करती हूँ
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Very nice
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🙏🙏
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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बेहतरीन
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🙏🙏
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