हम उनमें थे — वो मुझमें थे, उफ़ !!!! , वो क्या दिन थे।
जब हम रुठ जाते थे, तब वो चाँद सितारे तोड़ लाते थे।।
बीते कल
Comments
5 responses to “बीते कल”
-

सुन्दर
-
सुंदर
-

बहुत खूब।
मैं भी कहूं अमित जी ये चांद तारें आज आसमान में क्यों नही दिख रहे है😊 जरूर किसी आशीक ने तोड़ लिए होंगे।😊बस थोड़ा सा मजाक सर
-
बहुत ही सुंदर , एक दूसरे से प्रेम की पराकाष्ठा में जो होता है उसका सरल शब्दों में सुन्दर वर्णन किया है आपने
-
अति उत्तम
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.