बूढ़े और बच्चे

बच्चे बूढ़े एक से, दोनों को दे प्यार
दीपक हैं परिवार के, करते हैं उपकार
करते हैं उपकार, जरूरत इन्हे तुम्हारी
रखना सदा प्रसन्न, उठाओ जिम्मेदारी
कह पाठक कविराय, ये दोनों दिल के सच्चे
भूतकाल में वृद्ध, व भावी होते बच्चे

Comments

4 responses to “बूढ़े और बच्चे”

  1. Pragya

    कहा भी गया है बच्चे और बूढ़े एक समान ही होते हैं

  2. आपकी रचना बहुत ही सुंदर है कहा भी गया है कि बच्चे बूढ़ी एक समान है उनका ख्याल भी एक समान रखना चाहिए

  3. बेहतरीन रचना

  4. अतिसुंदर भाव 

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