कुण्डलिया छोटा परिवार

छोटा हो परिवार अब, रखना इसका ध्यान
जनसंख्या तलवार सी, निकल रही है म्यान
निकल रही है म्यान, समस्या होगी भारी
धरती का विस्तार, न होगी मारामारी
कह पाठक कविराय, शपथ लो जल ले लोटा
हम दो के दो चार, नियोजन से हो छोटा

Comments

4 responses to “कुण्डलिया छोटा परिवार”

  1. Pragya

    अति सुन्दर संदेश, छंद रचना

  2. छोटा परिवार सुखी परिवार की भावना को लिए बहुत ही सुंदर संदेश

  3. बहुत ही लाजवाब रचना

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