मैं भी तो नन्ही कली हूँ, तेरे अंदर ही पली हूँ
तू ही तो ज़रिया है माँ, मैं तेरे कदमों से चली हूँ
बस मुझे इतना बता माँ,
क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ?
मैंने तेरे पेट में दुनियांं समझकर जी लिया,
जो मिला तुझसे वही खाया वही था पी लिया..
क्या हुई मुझसे खता माँ,
क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ?
मैं बड़ी होकर भी तुझ पर बोझ न बनती कभी,
साज़ बन जाती तेरा मैं, सोज़ न बनती कभी..
क्यूँ मिली मुझको सज़ा माँ,
क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ?
मायने:
साज़ – संगीत वाद्य
सोज़ – जलन
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