बेवफा से वफ़ा

दिल ले के वो नादान, दग़ाबाज़ी करते चले गए।
रेत में हम उनके लिए, महल बनाते चले गए।।
हमें क्या पता था, खूबसूरत समंदर की बेवफ़ाई।
हम तो समंदर की सुरत पे, एतवार करते चले गए।।
जो होना था सो तो हो गया, क्या करे “अमित ” ।
ए आँखें भी बिन सावन के ही, बरसते चले गए।।

Comments

10 responses to “बेवफा से वफ़ा”

  1. Praduman Amit

    Thanks Pabdit Jee

    1. Praduman Amit

      Thank u so much

  2. उम्दा पंक्तियाँ

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया मेहरबान।

    1. Praduman Amit

      धन्यबाद।

  3. सुन्दर रचना

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया सुमन जी।

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