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  1. मुहवा तोहार टुकड़ा चान जस लगेला अंजोर |
    उठेला पलक आँख तोहार सांझ लगेला भोर |
    — बहुत सुंदर पंक्तियां हैं, पूरे गीत में माधुर्य बिखरा हुआ है। मुहं की चाँद के साथ जो उपमा की गई है, वह बहुत ही सुंदर रूप में खप रही है।

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