बहुत देर से ही सही मगर,
समझ में आया,
मगर से हो तुम,
मेरे झील से जीवन में।
मगर से हो तुम
Comments
14 responses to “मगर से हो तुम”
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद मैम
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क्या बात है यमक अलंकार का सुंदर प्रयोग
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बहुत-बहुत धन्यवाद।
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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बहुत सुन्दर
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धन्यवाद
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